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“योगी सरकार ने यूपी की सरकारी भर्तियों में 60% आरक्षण के सख्त अनुपालन का आदेश जारी किया है। SC को 21%, ST को 2%, OBC को 27% और EWS को 10% आरक्षण मिलेगा।

हाइलाइट्स :

  • यूपी सरकारी नौकरियों में कुल 60% आरक्षण लागू रहेगा
  • SC को 21%, ST को 2%, OBC को 27% और EWS को 10% आरक्षण
  • क्षैतिज आरक्षण में दिव्यांग, महिलाएं, पूर्व सैनिक शामिल
  • लेखपाल भर्ती विवाद के बाद सरकार का सख्त आदेश
  • सभी भर्ती बोर्डों को आरक्षण गणना पुनः जांचने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम देवराज ने एक विस्तृत आदेश जारी किया है, जिसमें राज्याधीन सेवाओं में ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण के नियमों के पूर्ण अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।

60% आरक्षण व्यवस्था रहेगी लागू

जारी आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरियों में कुल 60 प्रतिशत आरक्षण लागू रहेगा। इसके तहत—

  • अनुसूचित जाति (SC) – 21%
  • अनुसूचित जनजाति (ST) – 2%
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) – 27%
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 10%

यह व्यवस्था संबंधित आरक्षण अधिनियमों और नियमावलियों के अंतर्गत लागू की गई है।

क्षैतिज आरक्षण का भी पालन अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊर्ध्वाधर आरक्षण के साथ-साथ क्षैतिज आरक्षण का भी पूरी तरह पालन किया जाए। इसके अंतर्गत—

  • शारीरिक रूप से दिव्यांग
  • स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित
  • भूतपूर्व सैनिक
  • महिलाएं
  • उत्कृष्ट खिलाड़ी (1999 के शासनादेश व 2022 नियमावली के अनुसार)

को निर्धारित आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।

लेखपाल भर्ती विवाद बना वजह

हाल ही में पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने लेखपाल भर्ती को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इसमें आरोप लगाया गया था कि लेखपाल भर्ती में OBC वर्ग को पर्याप्त आरक्षण नहीं दिया गया। जांच में यह शिकायत सही पाई गई।

बताया जा रहा है कि 7994 पदों वाली लेखपाल भर्ती के प्रारंभिक विज्ञापन में OBC के पद कम दर्शाए गए थे, जिसके बाद विरोध हुआ और संशोधन कर OBC वर्ग के लिए सैकड़ों पद बढ़ाए गए। इस मामले में सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

भर्ती बोर्डों को सख्त निर्देश

प्रमुख सचिव एम देवराज ने आदेश में कहा है कि—

  • UPPSC
  • UPSSSC
  • अन्य सभी भर्ती बोर्ड और चयन संस्थाएं

अपने स्तर पर आरक्षण रिक्तियों की गणना का पुनः परीक्षण करें।
यदि किसी प्रकार की विसंगति या गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसे तुरंत ठीक कर आगे की कार्रवाई की जाए।

राजनीतिक आरोपों के बीच सरकार सख्त

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने सरकार पर PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के अधिकार छीनने का आरोप लगाया था।
हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा था—

“संविधान और आरक्षण रोस्टर में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

सरकार का कहना है कि इस आदेश से सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, न्याय और संवैधानिक व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

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