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“UP Census 2027 के दौरान गलत जानकारी देना या जनगणना अधिकारियों के सवालों का जवाब देने से इनकार करना दंडनीय अपराध होगा। Census Act 1948 के तहत तीन साल तक की सजा और एक हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।”

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में Census 2027 India की प्रक्रिया मई से शुरू होने जा रही है। पहली बार डिजिटल जनगणना के तहत लोगों को ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान गलत जानकारी देना या सवालों का जवाब देने से इनकार करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।

7 मई से शुरू होगी स्वगणना प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार 7 मई से 21 मई 2026 तक नागरिकों को Self Enumeration (स्वगणना) का विकल्प मिलेगा। इस दौरान लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

इसके बाद 22 मई से प्रगणक (Enumerator) घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे।

Census Act 1948 के तहत सख्त नियम

जनगणना अधिकारियों के मुताबिक Census Act 1948 के तहत गलत जानकारी देना, सवालों का जवाब देने से मना करना या जनगणना अधिकारी को काम करने से रोकना कानूनी अपराध है।

ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना और कुछ परिस्थितियों में तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

विकास योजनाओं के लिए जरूरी हैं सही आंकड़े

विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना के जरिए देश और राज्य की जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और सुविधाओं से जुड़ी वास्तविक स्थिति का पता चलता है।

इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार विकास योजनाएं, बजट और कल्याणकारी कार्यक्रम तैयार करती है।

व्यक्तिगत जानकारी रहेगी पूरी तरह गोपनीय

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यह जानकारी केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए उपयोग होती है और किसी अन्य संस्था या अदालत को सीधे साझा नहीं की जाती।

जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा

जनगणना शुरू होने से पहले लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। एनिमेशन वीडियो और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को सही जानकारी देने और जनगणना में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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