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राम मंदिर शास्त्र विवाद: ध्वजारोहण समारोह में शंकराचार्यों को न बुलाने पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शास्त्रों में ध्वजारोहण का कोई उल्लेख नहीं है और राम मंदिर में सब मनमानी तरीके से हो रहा है।”

अयोध्या। राम मंदिर शास्त्र विवाद एक बार फिर चर्चा में है। अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण समारोह में शंकराचार्यों को आमंत्रित न करने के फैसले पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ध्वजारोहण का कोई प्रमाण नहीं मिलता और जो कुछ भी किया जा रहा है—वह शास्त्र सम्मत नहीं है।

शंकराचार्य ने कहा,
“मैंने शास्त्रों में कहीं नहीं पढ़ा कि ध्वजारोहण किया जाए। मंदिर के शिखर की प्रतिष्ठा होती है। यहां जो हो रहा है वह मनमानी है। जब शास्त्र के अनुसार कुछ नहीं हो रहा, तो हमारे शामिल होने का कोई अर्थ नहीं।”

अयोध्या में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में शंकराचार्यों को न बुलाने का निर्णय पहले से ही विवाद का विषय बना हुआ था। अब शंकराचार्य के इस बयान ने धार्मिक और सांस्कृतिक बहस को और तेज कर दिया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय विधियों को दरकिनार कर किसी भी कार्यक्रम का आयोजन उचित नहीं है। शंकराचार्य के बयान के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या राम मंदिर में होने वाले अनुष्ठान पूरी तरह शास्त्रीय नियमों के अनुसार हो रहे हैं या नहीं।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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