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अलंकार अग्निहोत्री धरना: बरेली डीएम कार्यालय के बाहर PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री धरने पर बैठे। निलंबन को साजिश बताते हुए डीएम से सवाल पूछे, प्रशासन ने आरोपों का खंडन किया।

हाइलाइट्स :

  • बरेली डीएम कार्यालय के बाहर अलंकार अग्निहोत्री धरना
  • निलंबन को बताया सुनियोजित साजिश
  • डीएम से अपशब्दों वाले फोन कॉल पर जवाब की मांग
  • प्रशासन ने बंधक बनाने के आरोपों को नकारा
  • मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई

बरेली। यूजीसी विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार को उन्होंने बरेली डीएम कार्यालय के बाहर धरना देकर अपने निलंबन को सुनियोजित साजिश करार दिया और जिलाधिकारी को खुली चुनौती दी।

धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री ने मांग की कि जिलाधिकारी स्वयं आकर यह स्पष्ट करें कि सोमवार शाम किस व्यक्ति का फोन आया था, जिसमें पंडित समाज के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यदि डीएम नहीं आते हैं तो प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को आना चाहिए।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस पर नगर मजिस्ट्रेट रहते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने अपने कार्यालय में अपने नाम के आगे ‘RESIGNED’ लिखकर और भाजपा विरोधी नारे वाला पोस्टर लगाकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया था। इसके बाद डीएम अविनाश सिंह द्वारा उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया था।

बातचीत के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम कार्यालय में करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। देर रात उन्होंने सरकारी आवास छोड़ने का भी फैसला लिया और सुरक्षा को लेकर खतरे की बात कही।

हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने कहा कि बंधक बनाए जाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। अलंकार स्वयं मिलने आए थे और वहां एडीएम सिटी व एडीएम प्रशासन भी मौजूद थे। बातचीत के बाद वह स्वयं चले गए।

इधर, शासन की ओर से जारी आदेश में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत अलंकार अग्निहोत्री को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली भूपेंद्र एस चौधरी को सौंपी गई है।

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