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UP SI Exam Controversy Lucknow: उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा में ‘अवसरवादी’ शब्द के साथ ‘पंडित’ विकल्प दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने जांच के आदेश दिए हैं, जबकि ब्राह्मण विधायकों ने CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न को लेकर प्रदेश में विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा में पूछे गए एक सवाल में ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ वाक्यांश के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर ब्राह्मण समाज और जनप्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

इस मुद्दे को लेकर कई ब्राह्मण विधायकों ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं हजरतगंज कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ शिकायत भी दी गई है।

मामले में डिप्टी सीएम Brajesh Pathak ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि परीक्षा में पूछा गया यह प्रश्न पूरी तरह अस्वीकार्य है और सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

31वें सवाल को लेकर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में 31वें नंबर पर यह सवाल पूछा गया था—

‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए:
(A) सदाचारी
(B) पंडित
(C) अवसरवादी
(D) निष्कपट

इस प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में रखने को लेकर ब्राह्मण समाज में नाराजगी जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि ‘पंडित’ शब्द विद्वान और सम्मानित व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है, ऐसे में उसे नकारात्मक अर्थ वाले संदर्भ में रखना अनुचित है।

ब्राह्मण विधायकों ने CM को लिखी चिट्ठी

देवरिया सदर से भाजपा विधायक Shalabh Mani Tripathi ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि हाल के दिनों में एक वर्ग विशेष को लक्षित कर विवादास्पद विषय सामने लाए जा रहे हैं, जिससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो रहा है।

जौनपुर के बदलापुर से विधायक Ramesh Chandra Mishra ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ‘अवसरवादिता’ जैसे नकारात्मक शब्द से ‘पंडित’ को जोड़ना पूरी तरह अनुचित और असंवेदनशील है।

बांदा सदर से विधायक Prakash Dwivedi ने अपने पत्र में लिखा कि ‘पंडित’ शब्द का अर्थ विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा होता है, इसलिए इस प्रकार का प्रयोग समाज की भावनाओं को आहत करता है।

हजरतगंज कोतवाली में शिकायत

इस मामले को लेकर ब्राह्मण समाज से जुड़े एक व्यक्ति ने लखनऊ के Hazratganj स्थित कोतवाली में लिखित शिकायत दी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि परीक्षा के प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द का गलत संदर्भ में प्रयोग कर समाज की भावनाओं को आहत किया गया है।

कोतवाली प्रभारी विक्रम सिंह को दी गई शिकायत में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

भर्ती बोर्ड ने दिए जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने के बाद Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board ने भी इसे संज्ञान में लिया है। बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा की पहली पाली में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर चर्चा हो रही है, जिस पर जांच के आदेश दिए गए हैं।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र स्थानीय स्तर पर तय नहीं किए जाते। प्रश्नपत्र उन संस्थाओं द्वारा तैयार किए जाते हैं जो परीक्षा से पहले उसकी गोपनीयता सुनिश्चित करती हैं। यहां तक कि बोर्ड स्तर पर भी अधिकारी और कर्मचारी प्रश्नपत्रों को पहले से नहीं देख सकते। परीक्षा केंद्रों पर ही सील्ड पैकेट खोलकर प्रश्नपत्र वितरित किए जाते हैं।

परीक्षा के दौरान वायरल हुआ पेपर

बताया जा रहा है कि पहली शिफ्ट के दौरान ही सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल हो गया था। हालांकि बोर्ड ने उसी समय इसे फर्जी बताते हुए कहा था कि वायरल हो रहा पेपर वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं है।

बाद में परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के अनुसार वायरल पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र अलग पाए गए। बोर्ड ने इस मामले में भ्रामक सूचना फैलाने वालों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।

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लखनऊ से स्टेट हेड संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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