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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना कर नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समावेशी समाज और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर जोर दिया।

अयोध्या। द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को रामनगरी अयोध्या में स्थित राम मंदिर परिसर में श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना कर देशवासियों को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2047 तक इन लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है।

राष्ट्रपति मुर्मु श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रण पर लगभग डेढ़ वर्ष के अंतराल के बाद दूसरी बार अयोध्या पहुंचीं। उन्होंने राम मंदिर निर्माण से जुड़े चुनिंदा शिल्पियों (कर्मयोगियों) को सम्मानित किया और उपस्थित रामभक्तों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि “प्रभु श्रीराम को नमन करना और भारत माता का वंदन करना हमारे लिए समान भाव का विषय है।” उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़ी घटनाएं—भूमिपूजन, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण—भारत के इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।

राष्ट्रपति ने अयोध्या आगमन को अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि की पावन धूलि का स्पर्श प्राप्त करना उनके लिए कृतार्थ करने वाला क्षण है। उन्होंने कहा कि देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी आयामों में हो रहा है। “देव-भक्ति और देश-भक्ति का मार्ग एक ही है, और ‘घट-घट व्यापी राम’ की भावना हमें एकता के सूत्र में बांधती है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि रामराज्य के आदर्शों पर चलते हुए नैतिकता और धर्माचरण आधारित राष्ट्र का निर्माण संभव है। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को 2047 या उससे पहले ही हासिल कर सकता है।

इस अवसर पर आनंदीबेन पटेल ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अयोध्या को “वैश्विक चेतना का केंद्र” बताया और कहा कि राम मंदिर अब राष्ट्र मंदिर का स्वरूप ले चुका है।

वहीं, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व के कई हिस्सों में संघर्ष चल रहा है, ऐसे में अयोध्या में श्रीराम यंत्र स्थापना का यह आयोजन “रामराज्य की अनुभूति” कराता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले अनेक लोगों को आमंत्रित किया गया, जिनमें 1984 से जुड़े आंदोलनकारियों की भी उपस्थिति रही। श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही मंदिर निर्माण को पूर्णता का प्रतीकात्मक स्वरूप मिलने की बात भी वक्ताओं ने कही।

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लखनऊ से स्टेट हेड संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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