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नाबालिग को कार चलाने की इजाजत देने पर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर कोर्ट ने पिता को तीन साल की जेल और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 199-A के तहत गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी 12 महीने के लिए रद्द किया गया। जानें पूरी कानूनी कार्रवाई।

हाइलाइट्स :

  • नाबालिग ड्राइविंग मामले में पिता को 3 साल की जेल
  • 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया
  • मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 199-A के तहत सजा
  • कार का रजिस्ट्रेशन 12 महीने के लिए रद्द
  • श्रीनगर स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) कोर्ट का फैसला

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति देने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बडगाम जिले के एक व्यक्ति को तीन साल की सजा और 25,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। इसके साथ ही संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन 12 महीने के लिए रद्द करने का आदेश भी दिया गया है।

यह फैसला श्रीनगर के स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) शब्बीर अहमद मलिक की अदालत ने सुनाया।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199-A के तहत कार्रवाई

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199-A के तहत चालान प्रस्तुत किया गया था। चूंकि ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति नाबालिग था, इसलिए कानूनी जिम्मेदारी उसके अभिभावक और वाहन मालिक पर तय की गई।

अदालत ने कहा कि चालान में स्पष्ट उल्लेख है कि नियम तोड़ने वाला नाबालिग है और उसके अभिभावक के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, जो वाहन का पंजीकृत मालिक भी है।

अभिभावकों की कानूनी जिम्मेदारी

फैसले में अदालत ने कहा कि जब कोई नाबालिग मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपराध करता है, तो उसके अभिभावक या वाहन स्वामी की जवाबदेही तय होती है। न्यायालय ने धारा 199-A का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानून अभिभावक को सीधे जिम्मेदार ठहराता है।

12 महीने के लिए रजिस्ट्रेशन रद्द

मामले में शामिल वाहन (पंजीकरण संख्या JK04K0673) का रजिस्ट्रेशन 12 महीने के लिए निरस्त करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने वाहन एवं संबंधित दस्तावेज नियमानुसार पंजीकृत स्वामी को सौंपने के निर्देश भी दिए हैं।

अदालत ने चालान के निपटारे के बाद मामले को रिकॉर्ड में जमा करने का आदेश दिया।

सख्त संदेश

इस फैसले को ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों को वाहन चलाने की अनुमति देना गंभीर अपराध है और इसके लिए अभिभावकों को कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।

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