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बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से डेयरी वैल्यू चेन ने 7 जिलों की 86 हजार महिलाओं को आर्थिक संबल दिया। ‘बालिनी’ मॉडल से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था।

हाइलाइट्स :

  • बुंदेलखंड में डेयरी वैल्यू चेन से महिला सशक्तिकरण
  • 86 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं दुग्ध व्यवसाय से आत्मनिर्भर
  • ‘बालिनी’ महिला प्रोड्यूसर कंपनी ने खत्म की बिचौलियों की भूमिका
  • 952 गांवों और 3,600 स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क
  • डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता और नए रोजगार के अवसर

बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर—कभी सूखा, पलायन और बेरोजगारी के लिए पहचाना जाने वाला बुंदेलखंड अब महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन के तहत विकसित की गई डेयरी वैल्यू चेन ने इस क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया है।

चित्रकूट, झांसी, ललितपुर सहित बुंदेलखंड के सात जिलों में 86 हजार से अधिक महिलाएं दुग्ध व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। ये महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बन रही हैं।

‘बालिनी’ मॉडल: महिला नेतृत्व में बदलाव

बुंदेलखंड में डेयरी सेक्टर को संगठित करने के लिए ‘बालिनी’ महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया गया। इस कंपनी की पूरी कमान महिला दुग्ध उत्पादकों के हाथों में है। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई और महिलाओं को उनके दूध का उचित मूल्य सीधे मिलने लगा।

इस मॉडल ने न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि की, बल्कि उन्हें बाजार से सीधे जोड़कर आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

952 गांवों तक फैला नेटवर्क

डेयरी वैल्यू चेन परियोजना का विस्तार अब 952 गांवों तक हो चुका है। इसके अंतर्गत:

  • 3,600 स्वयं सहायता समूह जुड़े
  • 86,000 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित
  • दूध संग्रह से लेकर गुणवत्ता परीक्षण तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी
  • डिजिटल भुगतान व्यवस्था से समय पर भुगतान और भरोसा

डिजिटल सिस्टम ने ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार भी पैदा किए हैं और तकनीक के प्रति महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई है।

ग्रामीण विकास की धुरी बनी महिलाएं

योगी सरकार की इस पहल का मूल उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की धुरी बनाना है। आज ‘बालिनी’ केवल एक दुग्ध कंपनी नहीं, बल्कि एक सफल सामाजिक-आर्थिक मॉडल बन चुकी है।

यह पहल साबित करती है कि सरकार की योजनाएं जब सही दिशा और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ लागू होती हैं, तो वे जमीन पर बड़ा बदलाव लाती हैं। बुंदेलखंड की महिलाएं अब क्षेत्र की तरक्की की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरी हैं।

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