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पति की शिकायत न करना कमजोरी नहीं, कभी-कभी वह रिश्ते बचाने के लिए चुप रहता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध संबंध का झूठा आरोप भी मानसिक क्रूरता माना।

हाइलाइट्स :

  • पति की शिकायत न करना कमजोरी नहीं, हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
  • रिश्ते बचाने के लिए पति की चुप्पी को क्रूरता न होने का प्रमाण नहीं माना
  • बिना सबूत अवैध संबंध का आरोप भी मानसिक क्रूरता
  • पुरुष सामाजिक दबाव में कई बार सहन करता है अत्याचार

अभयानंद शुक्ल
कार्यकारी संपादक

लखनऊ। पति की शिकायत न करना कमजोरी नहीं, बल्कि कई बार यह परिवार और वैवाहिक संबंधों को बचाने की कोशिश भी हो सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक क्रूरता से जुड़े एक अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि यदि पति पत्नी की प्रताड़ना के बावजूद शिकायत नहीं करता, तो इससे यह साबित नहीं होता कि उसके साथ क्रूरता नहीं हुई।

हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में पुरुष अक्सर पारिवारिक दबाव, सामाजिक बदनामी और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए असहनीय परिस्थितियों को सहन कर लेते हैं। इस चुप्पी को उनकी कमजोरी नहीं माना जा सकता।

अवैध संबंध का झूठा आरोप भी मानसिक क्रूरता

पति की शिकायत न करना कमजोरी नहीं—इस सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि पति के चरित्र पर बिना किसी ठोस सबूत के अवैध संबंध का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोप पति की सामाजिक और मानसिक हत्या के समान होते हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ का फैसला

न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने इन टिप्पणियों के साथ पति की तलाक याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने माना कि लंबे समय तक गलत व्यवहार सहना पत्नी को संरक्षण नहीं दे सकता।

क्या है पूरा मामला

मामला वाराणसी का है। पति गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में डिप्टी मैनेजर है, जबकि पत्नी वाराणसी में तैनात एक अध्यापिका हैं। दोनों की शादी 25 नवंबर 2003 को हुई थी और उनके दो बेटे हैं। आपसी विवाद और शक के चलते वर्ष 2011 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। बच्चों का पालन-पोषण दादा-दादी कर रहे हैं।

फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक

पति ने वर्ष 2014 में फैमिली कोर्ट में पत्नी की क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की थी। पत्नी ने इसके जवाब में पति पर अपनी भाभी से अवैध संबंध का आरोप लगाया। हाईकोर्ट ने पति द्वारा पेश की गई वॉइस रिकॉर्डिंग को अहम साक्ष्य मानते हुए तलाक मंजूर कर लिया।

दूरगामी असर वाला फैसला

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पति की शिकायत न करना कमजोरी नहीं वाला यह फैसला भविष्य में वैवाहिक विवादों में पुरुषों को भी न्यायिक संरक्षण देने वाला साबित होगा।

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