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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे पर रोक के पालन और कार्रवाई पर सरकार से एक महीने में जवाब दाखिल करने को कहा। जानें हाईकोर्ट के आदेश और याचिकाकर्ता की दलील।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे (काइट स्टिंग) पर रोक और इस पर की गई कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता को आदेश दिया है कि वे सरकार से निर्देश प्राप्त कर एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करें।

पिछली याचिकाओं और आदेशों का उल्लंघन

यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर आया। अधिवक्ता ने बताया कि:

  • 2015 में जनहित याचिका अनुराग मिश्रा बनाम राज्य में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
  • 14 जनवरी 2026 को हिमांशु श्रीवास्तव बनाम राज्य मामले में भी कोर्ट ने पुराने आदेशों की पुन: पुष्टि की और सख्ती से पालन कराने को कहा।
  • बावजूद इसके प्रतिबंधित मांझा खुलेआम बिक रहा है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से उपलब्ध है।

अवहेलना के कारण हादसे

याची ने अदालत को बताया कि अधिकारियों की लापरवाही और आदेशों की अवहेलना के कारण कई घटनाएं हो चुकी हैं:

  • 22 जनवरी 2026 को प्रयागराज में अधिवक्ता अनूप श्रीवास्तव गले में मांझा फंसने से घायल हो गए।
  • जौनपुर, उन्नाव, मेरठ और लखनऊ सहित कई जिलों में एक साल में मौत और घायल होने के कई मामले दर्ज हुए।

अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि यह प्रतिबंधित मांझा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन कर रहा है।

कोर्ट का निर्देश

कोर्ट ने याची को 48 घंटे के भीतर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को याचिका की प्रति उपलब्ध कराने और एक महीने बाद अगली सुनवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।

यह मामला कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़ा है, साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

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