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योगी सरकार ने कफ सिरप मामले में SIT बनाई। DGP ने बताया कि कोडीन कफ सिरप का इस्तेमाल नशे में हो रहा था। 28 जिलों में 128 FIR, 300 मेडिकल स्टोरों की जांच।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध व्यापार और नशे में इसके उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आने के बाद योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव संजय प्रसाद, FSDA सचिव रोशन जैकब और DGP राजीव कृष्ण ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया है। अब तक तीन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

कफ सिरप बीमारी में नहीं, नशे में इस्तेमाल हो रहा था — DGP

DGP राजीव कृष्ण ने कहा कि पिछले दो महीनों की जांच में कई पुख्ता सबूत मिले हैं कि कोडीन कफ सिरप को बीमारी में नहीं, बल्कि नशे के रूप में बेचा जा रहा था, जो NDPS एक्ट के तहत गंभीर अपराध है।

FSDA ने पूरे प्रदेश में व्यापक अभियान चलाकर 28 जिलों में 128 FIR दर्ज की, जिनमें—

  • बनारस: 38
  • जौनपुर: 16
  • कानपुर: 8
  • गाजीपुर: 6
  • लखीमपुर: 4
  • लखनऊ: 4 FIR

शामिल हैं।

रोशन जैकब ने कहा– MP केस और यूपी केस का कोई कनेक्शन नहीं

FSDA सचिव रोशन जैकब ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर चल रही दावों के विपरीत मध्य प्रदेश की घटना और यूपी के कफ सिरप केस का कोई संबंध नहीं है

उन्होंने बताया कि—

  • सोनभद्र में 20 दिन पहले एक ट्रक कफ सिरप पकड़ा गया।
  • उसके आधार पर रांची में भी एक ट्रक बरामद हुआ।
  • कलेक्शन और परचेज डेटा नहीं मिला, यानी दवा legitimate supply chain के जरिए नहीं बेची जा रही थी।

राज्य सरकार ने 300 मेडिकल स्टोर व वितरकों की जांच कराई, जिसमें कई फर्में फर्जी या अस्तित्वहीन पाई गईं।

DGP ने कहा कि—
“कफ सिरप का नॉर्मल मेडिकल यूज के अलावा कोई भी उपयोग गैरकानूनी अपराध है।”

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक: “चाहे नेता हो या कोई भी, सब नपेंगे”

जौनपुर में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने साफ कहा कि—
“कफ सिरप मामले में जो दोषी मिलेगा, चाहे नेता हो या कोई और, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।”

सरकार का फोकस सिर्फ छोटे रिटेलर नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन के बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचना है।

फर्जी लाइसेंस, अवैध फर्म और नशे की सप्लाई का बड़ा रैकेट

जांच में यह सामने आया है कि—

  • कई मेडिकल स्टोर और फर्म अस्तित्व में ही नहीं हैं
  • कई के लाइसेंस पहले ही निरस्त हो चुके थे
  • फिर भी 1 से 3 लाख बोतल की भारी बिक्री की गई
  • इस नेटवर्क के जरिए कफ सिरप नेपाल व बांग्लादेश तक भेजा जा रहा था

लखनऊ, लखीमपुर खीरी, बहराइच से नेपाल और
वाराणसी व गाजियाबाद से बांग्लादेश तक सप्लाई की पुष्टि हुई है।

संगठित अपराध का रूप ले चुका था रैकेट

राजीव कृष्ण ने स्पष्ट किया कि कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप को—

बीमारी नहीं, बल्कि नशे के रूप में प्रयोग कराया जा रहा था, जो संगठित अपराध की श्रेणी में आता है।

नेपाल और बांग्लादेश तक सप्लाई

जांच में यह भी सामने आया है कि—

  • लखनऊ, लखीमपुर खीरी और बहराइच से कफ सिरप की भारी खेप नेपाल भेजी जा रही थी।
  • वाराणसी और गाजियाबाद से इसकी सप्लाई बांग्लादेश तक हो रही थी।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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