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“राजस्थान के कोटा में श्री बांके बिहारी मंदिर की 15 हेक्टेयर जमीन मिलने के बाद हाईपावर्ड कमेटी ने देशभर में मंदिर की अन्य संपत्तियों की तलाश का फैसला किया है। जानिए पूरा मामला।”

हाइलाइट्स :

  • राजस्थान के कोटा जिले में बांके बिहारी मंदिर की 15 हेक्टेयर बेशकीमती जमीन मिली
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाईपावर्ड कमेटी ने किया खुलासा
  • अब देशभर के राज्यों में मंदिर संपत्तियों की खोज का निर्णय
  • विभाजन से पहले पाकिस्तान में भी संपत्तियों के प्रमाण मिलने का दावा
  • ऐतिहासिक ग्रंथों और अभिलेखों से मिल रही पुष्टि

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी संपत्तियों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। राजस्थान के कोटा जिले में मंदिर की करीब 15 हेक्टेयर जमीन मिलने के बाद अब देशभर में मंदिर से जुड़ी अन्य संपत्तियों की खोज की जाएगी।

मंदिर प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित बांके बिहारी मंदिर हाईपावर्ड कमेटी ने राजस्थान के कोटा जिले में स्थित मंदिर की बहुमूल्य भूमि को ट्रेस किया है। इस भूमि से जुड़े मूल दस्तावेज स्थानीय प्रशासन से प्राप्त कर लिए गए हैं।

वृंदावन स्थित लक्ष्मण शहीद स्मारक भवन में हुई बैठक में कमेटी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में 17 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब देश के विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों से संपर्क कर उन संपत्तियों का पता लगाया जाएगा, जो कागजों में मंदिर के नाम दर्ज हैं लेकिन वर्तमान प्रबंधन के संज्ञान में नहीं हैं।

अध्यक्ष का बयान

हाईपावर्ड कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि “कोटा में जमीन मिलने के बाद हमारा लक्ष्य देशभर में मंदिर की सभी संपत्तियों को व्यवस्थित करना है। इसके लिए राज्यों के शीर्ष अधिकारियों से सहयोग लिया जाएगा।”

पाकिस्तान में भी संपत्तियों का दावा

इतिहासकारों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भारत-पाक विभाजन से पहले बांके बिहारी जी की संपत्तियां उन क्षेत्रों में भी थीं जो अब पाकिस्तान में हैं।
प्राचीन अभिलेख बताते हैं कि:

  • मुल्तान (पाकिस्तान) के ‘उच्च ग्राम’ में विशाल हवेली
  • सियालकोट और सिंध में भूमि और भवन
  • उल्लेख मिलता है श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ और केलिमालजु जैसे ग्रंथों में

इतिहास के अनुसार,

  • मुगल सम्राट अकबर ने वर्ष 1594 में 25 बीघा भूमि
  • जयपुर नरेश सवाई मानसिंह ने 1592 में 3 एकड़ भूमि
  • ग्वालियर, भरतपुर और करौली रियासतों ने भी बहुमूल्य संपत्तियां अर्पित की थीं

बांके बिहारी मंदिर की संपत्तियों की खोज का यह अभियान न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह ऐतिहासिक और कानूनी महत्व भी रखता है। आने वाले समय में इस फैसले से मंदिर प्रबंधन को आर्थिक और प्रशासनिक मजबूती मिलने की संभावना है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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