निजीकरण के खिलाफ आंदोलन, बिजली कर्मचारी विरोध, 27 लाख कर्मचारी प्रदर्शन, यूपी बिजली निजीकरण, विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति, देशव्यापी आंदोलन बिजली कर्मचारी, ऊर्जा विभाग विरोध, बिजली निजीकरण विवाद, Privatization protest India, 27 lakh power employees protest, electricity privatization opposition, nationwide electricity workers strike, power sector protest India, UP electricity employees protest, anti-privatization movement India, बिजली कर्मचारी विरोध फोटो, निजीकरण आंदोलन की तस्वीर, 27 नवंबर प्रदर्शन इमेज, विद्युत कर्मचारियों का आंदोलन फोटो, power workers protest image, anti-privatization rally photo, nationwide electricity workers strike image, India power sector protest picture, #निजीकरणकेखिलाफआंदोलन, #बिजलीकर्मचारीविरोध, #27लाखकर्मचारी, #बिजलीनिजीकरण, #ElectricityProtest, #PowerEmployeesStrike, #AntiPrivatization, #UPNews, #NationalProtest, #EnergySector,

“निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को मजबूती देते हुए देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी 27 नवंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेंगे। UP में लंबे समय से चल रहे बिजली निजीकरण विरोध को अब देशव्यापी समर्थन मिल गया है। विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।’

लखनऊ। निजीकरण के खिलाफ आंदोलन अब देशव्यापी स्तर पर तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के बिजली कर्मचारी 27 नवंबर को बड़े स्तर पर सड़क पर उतरने जा रहे हैं। बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि इस दिन पूरे भारत के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

विद्युत कर्मचारी लंबे समय से बिजली आपूर्ति के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से न सिर्फ कर्मचारियों की सुरक्षा और रोजगार प्रभावित होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अधिक दरों पर बिजली खरीदनी पड़ेगी। समिति के सदस्यों का आरोप है कि निजी कंपनियों के आने से बिजली सेवा सार्वजनिक हित से हटकर व्यावसायिक मॉडल में बदल जाएगी, जिसका सीधा असर प्रदेश और देश की आम जनता पर पड़ेगा।

बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति के संयोजकों ने बताया कि यह आंदोलन केवल रोजगार की सुरक्षा नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने की लड़ाई है। उनका कहना है कि 27 नवंबर से यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा और सरकार का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।

कर्मचारियों के अनुसार निजीकरण लागू होने पर राज्य की विद्युत प्रणाली महंगी, अस्थिर और पूरी तरह से निजी कंपनियों के नियंत्रण में जा सकती है। इसी वजह से यह विरोध केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश के बिजली कर्मचारियों का संयुक्त अभियान बन चुका है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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